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परिवर्तनकारी एआई के लाभ भी हानि भी - डॉ0 चिन्मय पाण्ड्या

परिवर्तनकारी एआई के लाभ भी हानि भी - डॉ0 चिन्मय पाण्ड्या परिवर्तनकारी एआई के लाभ भी हानि भी - डॉ0 चिन्मय पाण्ड्या परिवर्तनकारी एआई के लाभ भी हानि भी - डॉ0 चिन्मय पाण्ड्या परिवर्तनकारी एआई के लाभ भी हानि भी - डॉ0 चिन्मय पाण्ड्या परिवर्तनकारी एआई के लाभ भी हानि भी - डॉ0 चिन्मय पाण्ड्या
20 फरवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में एआई और लोकतंत्र पर एक महत्वपूर्ण संवाद आयोजित हुआ, जिसे वैश्विक स्तर पर सराहना मिली। इस सत्र में दुनिया भर के संसदीय प्रतिनिधियों और एआई विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की और भारत की उस बढ़ती भूमिका को स्वीकार किया जो समावेशी और जिम्मेदार एआई शासन मॉडल को आकार देने में दिखाई दे रही है। 
चर्चा के दौरान सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि एआई विनियमन के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है, एल्गोरिदम में मौजूद पूर्वाग्रह और गलत सूचना से लोकतांत्रिक संस्थानों की सुरक्षा जरूरी है, तथा डिजिटल साक्षरता और सार्वजनिक अवसंरचना को मजबूत किया जाना चाहिए। साथ ही ऐसे एआई सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता बताई गई जो मानव गरिमा, समानता और अधिकारों को बनाए रखें। 
संवाद का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि बुद्धिमत्ता के इस नए युग में शासन को इस प्रकार पुनर्कल्पित किया जाए जहां नवाचार नैतिकता, समावेशिता और मानवता के सामूहिक हितों द्वारा निर्देशित हो। 
देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा इस सत्र की सफल मेजबानी एआई और लोकतंत्र पर वैश्विक संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई, जो शाश्वत मानवीय मूल्यों के साथ तकनीकी प्रगति के सामंजस्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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